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क्या अर्थ होता है वास्तुशास्त्र का

वास्तुशास्त्र का अर्थ होता है चारों दिशाओं से मिलने वाली ऊर्जा तरंगों का संतुलन। यदि ये तरंगें संतुलित रूप से आपको प्राप्त हो रही हैं,…..

तो घर में सुख और शांति बनी रहेगी। ऐसे में वास्तु को अपने अनुसार बनाए रखने के लिए कुछ विशेष प्रयासों को किया जाना आवश्यक है। इन प्रयासों के माध्यम से आप अपने घर को वास्तुदोष से बचा सकते हैं।

सूर्यास्त के समय अगर आपके घर पर कोई दूध, दही या प्याज मांगने आए तो इन तीनों चीजों को देने से साफ मना कर दें क्योंकि सूर्यास्त के समय किसी बाहरी व्यक्ति को ये तीनों चीजें देने से घर की बरक्कत समाप्त हो जाती है।

मुख्य द्वार के पास कभी भी कूड़ादान ना रखें इससे पड़ोसी शत्रु हो जाएंगे।

छत पर कभी भी अनाज या बिस्तर ना धोएं इससे ससुराल से संबंध खराब होने लगते हैं।

स्नान के बाद गीले या एक दिन पहले के प्रयोग किए गए तौलिए का प्रयोग ना करें इससे संतान हठी व परिवार से अलग होने लगती है अपनी बात मनवाने7 लगती है अतः रोज साफ सुथरा और सूखा तौलिया ही प्रयोग करें।

कभी भी यात्रा में पूरा परिवार एक साथ घर से ना निकले आगे पीछे जाएं इससे यश की वृद्धि होगी।

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