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Home / गीता ज्ञान

गीता ज्ञान

December, 2017

October, 2017

  • 10 October

    जानिये क्या है क्षमा का महत्त्व

    क्षमा न मांगने या न करने का बोझ अनंत जन्म-जन्मांतर तक रहता है, अगर हमारे शब्दों या कर्मों ने किसी को आहत किया है या हम किसी के शब्दों या कर्मों से आहत हुए हैं तो हमें क्षमा मांगने या क्षमा करने में देरी नहीं करनी चाहिये, क्योंकि यदि हम …

July, 2017

June, 2017

May, 2017

  • 29 May

    क्योँ है अभिमन्यु महाभारत महाकाव्य के अद्भुत पात्र

    अर्जुन एवं सुभद्रा का पुत्र अभिमन्यु महाभारत महाकाव्य का अद्भुत पात्र है। भगवान श्रीकृष्ण का यह भानजा अर्जुन के समान ही श्रेष्ठ धनुर्धन था। यह वीर्य में युधिष्ठिर के समान, आचार में श्रीकृष्ण के समान, भयंकर कर्म करने वालों में भीम के समान, विद्या- पराक्रम में अर्जुन के समान था। …

  • 7 May

    गीता के 16 अध्याय और ज्योतिष

    गीता के अठारह अध्यायों में भगवान श्रीकृष्ण ने जो संकेत दिए हैं, उन्हें ज्योतिष के आधार पर विश्लेषित किया गया है। इसमें ग्रहों का प्रभाव और उनसे होने वाले नुकसान से बचने और उनका लाभ उठाने के संबंध में यह सूत्र बहुत काम के लगते हैं। 1. शनि संबंधी पीड़ा …

April, 2017

  • 24 April

    सुन्दर प्रसंग ध्यान दे

    महाभारत का युद्ध चल रहा था – एक दिन दुर्योधन के व्यंग्य से आहत होकर “भीष्म पितामह” घोषणाकर देते हैं कि – ” मैं कल पांडवों का बध कर दूँगा ” उनकी घोषणा का पता चलते ही पांडवों के शिविर में बेचैनी बढ़ गई – भीष्म की क्षमताओं के बारे …

  • 11 April

    ब्रह्म, परमात्मा और भगवान

    भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं…. मनुष्याणां सहस्रेषु कश्चिद्यतति सिद्धये । यततामपि सिद्धानां कश्चिन्मां वेत्ति तत्वतः ॥ (गीता 7/3) हजारों मनुष्यों में से कोई एक मेरी प्राप्ति रूपी सिद्धि की इच्छा करता है और इस प्रकार सिद्धि की प्राप्ति के लिये प्रयत्न करने वाले मनुष्यों में से भी कोई एक ही मुझको …