_ap_ufes{"success":true,"siteUrl":"www.bhaktipravah.com","urls":{"Home":"http://www.bhaktipravah.com","Category":"","Archive":"http://www.bhaktipravah.com/2018/01/","Post":"http://www.bhaktipravah.com/jaaniye-samundra-tat-per-kiye-ja-sakne-wale-yoga/","Page":"http://www.bhaktipravah.com/homemag/","Attachment":"http://www.bhaktipravah.com/?attachment_id=8709","Nav_menu_item":"http://www.bhaktipravah.com/5131/","Wpcf7_contact_form":"http://www.bhaktipravah.com/?post_type=wpcf7_contact_form&p=4144"}}_ap_ufee
Home / संत प्रवचन

संत प्रवचन

मौन जोड़ता है परमात्मा से

प्रार्थना भाव है। और भाव शब्द में बंधता नहीं। इसलिए प्रार्थना जितनी गहरी होगी, उतनी नि:शब्द होगी। कहना चाहोगे बहुत, पर कह न पाओगे। प्रार्थना ऐसी विवशता है, ऐसी असहाय अवस्था है। शब्द भी नहीं बनते। आंसू झर सकते हैं। आंसू शायद कह पाएंगे, लेकिन नहीं कह पाएंगे कुछ। पर …

Read More »

करुणा है ज्ञान की संगिनी

थोड़ा जागो। पहला जागरण इस बात का कि यह संसार इतना मूल्यवान नहीं है कि इसमें तुम इतने परेशान हो। कोई आदमी तुम्हें गाली देता है; न तो वह आदमी इतना मूल्यवान है, न उसकी गाली इतनी मूल्यवान है कि तुम परेशान होओ। न तुम्हारा अहंकार इतना मूल्यवान है कि …

Read More »

श्री तरुण सागर जी महाराज 29

होली रंगों का त्योहार है लाल पिला नीला हरा सभी रंगों के साथ हम होली खेलते है … लेकिन कला रंग कोई काम में नहीं लेता … ऐसा क्यों? क्योकि सब ये ही चाहते है सबकी जिन्दगी रंगीन हो ,,,, कोई नहीं चाहता के उसकी जीवन में कुछ काला (गलत) …

Read More »

श्री तरुण सागर जी महाराज 28

जिंदगी में कभी दुःख और पीड़ा आये, तो उसे चुपचाप पी जाना, अपने दुःख दर्द दुनिया के लोगो दिखाते मत फिरना , क्योकि वे डाक्टर नहीं है , जो तुम्हारी समस्या का समाधान कर दे, यह दुनिया बड़ी जालिम है , तुम्हारे दुःखो को रो-रोकर पूछेंगी और फिर हँस-हंसकर दुनिया को बताती फिरेगी, …

Read More »

श्री तरुण सागर जी महाराज 27

पूरा देश ध्वनि प्रदूषण व वायु प्रदूषण से बचने के उपाय खोजने में लगा है। जबकि इससे बड़ी समस्या मनोप्रदूषण की है। गांधी जी ने तीन बंदर बनाए थे। उनको एक बंदर और बनाना था जो अपने हृदय पर हाथ रखे होता और संदेश देता कि बुरा मत सोचो। आज …

Read More »

श्री तरुण सागर जी महाराज 26

इन्सान के शरीर 45 डेल (इकाई) तक ही दर्द सह सकता है l परन्तु जन्म देते समय एक महिला को ५७ डेल (इकाई) तक दर्द महसूस करती है l यह दर्द 22 हड्डियों का एक साथ टूटने के बराबर है l अपनी माँ की प्यार करो , इस धरती पर …

Read More »

श्री तरुण सागर जी महाराज 25

धर्म का मूल-आचार अहिंसा है ! उस अहिंसा का पालन अनेकान्त दृष्टी के बिना संभव नहीं है ! क्यूंकि धर्म(जैन) दृष्टी से हिंसा न करते हुए भी मनुष्य हिंसक हो सकता है ! और हिंसा करते हुए भी हिंसक नहीं होता ! अत: जैनधर्म में हिंसा और अहिंसा व्यक्ति के …

Read More »

श्री तरुण सागर जी महाराज 24

जीवन में दो बात भूल जाना 1. तुमने किसी का भला किया हो तो उसे भूल जाओ और 2. किसी ने तुम्हारा बुरा किया हो तो उसे भी भूल जाओ क्युकी किसी का भला करके उसे याद दिलाना के तुमने उसके लिए किया तो तुम्हारे कर्म का कोई मतलब नहीं …

Read More »

श्री तरुण सागर जी महाराज 23

मनुष्य की गहरी से गहरी और पहली बीमारी अहंकारहै! जहाँ अहंकार है, वहां दया झूठी है, जहाँ अहंकार है, वहां अहिंसा झूठी है, जहाँ अहंकार है, वहां शांति झूठी है, और जहाँ अहंकार है, वहां कल्याण मंगल और लोकहित की बातें झूठी है, क्योंकि जहाँ अहंकार है, वहां ये सारी …

Read More »

श्री तरुण सागर जी महाराज 22

पैदा होने वाला हर बच्चा ना तो हिन्दू पैदा होता है l ना मुसलमान l वह केवल दिगंबर पैदा होता है l और वह इंसान होता है l उसे हिंदी मुसलमान का नाम देकर धर्म की रोटिया मत सेकिए l हां हिन्दुस्तान में पैदा होने वाला हर आदमी हिंदुस्तानी जरूर …

Read More »