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तरुण सागर जी

श्री तरुण सागर जी महाराज 31

आज का पारिवारिक माहोल होटल की तरह हो गया है … जैसे होटल में कौनसी टेबल पर कौन बैठा है किसी को नहीं पता होता…. एक आता है दूसरा चला जाता है …. यही हाल आज के इन्सान का है, एक घर में दो भाई है तो पहला आगे के …

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श्री तरुण सागर जी महाराज 30

माता – पिता बच्चो के जीवन की गीता है , क्युकी वो संतान के हर कष्ट को अमृत के तरह पीता है। बच्चो के झगड़ो में बड़ो और सास – बहु के झगडे में बाप – बेटे को कभी नहीं पड़ना चाहिए

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श्री तरुण सागर जी महाराज 29

होली रंगों का त्योहार है लाल पिला नीला हरा सभी रंगों के साथ हम होली खेलते है … लेकिन कला रंग कोई काम में नहीं लेता … ऐसा क्यों? क्योकि सब ये ही चाहते है सबकी जिन्दगी रंगीन हो ,,,, कोई नहीं चाहता के उसकी जीवन में कुछ काला (गलत) …

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श्री तरुण सागर जी महाराज 28

जिंदगी में कभी दुःख और पीड़ा आये, तो उसे चुपचाप पी जाना, अपने दुःख दर्द दुनिया के लोगो दिखाते मत फिरना , क्योकि वे डाक्टर नहीं है , जो तुम्हारी समस्या का समाधान कर दे, यह दुनिया बड़ी जालिम है , तुम्हारे दुःखो को रो-रोकर पूछेंगी और फिर हँस-हंसकर दुनिया को बताती फिरेगी, …

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श्री तरुण सागर जी महाराज 27

पूरा देश ध्वनि प्रदूषण व वायु प्रदूषण से बचने के उपाय खोजने में लगा है। जबकि इससे बड़ी समस्या मनोप्रदूषण की है। गांधी जी ने तीन बंदर बनाए थे। उनको एक बंदर और बनाना था जो अपने हृदय पर हाथ रखे होता और संदेश देता कि बुरा मत सोचो। आज …

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श्री तरुण सागर जी महाराज 26

इन्सान के शरीर 45 डेल (इकाई) तक ही दर्द सह सकता है l परन्तु जन्म देते समय एक महिला को ५७ डेल (इकाई) तक दर्द महसूस करती है l यह दर्द 22 हड्डियों का एक साथ टूटने के बराबर है l अपनी माँ की प्यार करो , इस धरती पर …

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श्री तरुण सागर जी महाराज 25

धर्म का मूल-आचार अहिंसा है ! उस अहिंसा का पालन अनेकान्त दृष्टी के बिना संभव नहीं है ! क्यूंकि धर्म(जैन) दृष्टी से हिंसा न करते हुए भी मनुष्य हिंसक हो सकता है ! और हिंसा करते हुए भी हिंसक नहीं होता ! अत: जैनधर्म में हिंसा और अहिंसा व्यक्ति के …

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श्री तरुण सागर जी महाराज 24

जीवन में दो बात भूल जाना 1. तुमने किसी का भला किया हो तो उसे भूल जाओ और 2. किसी ने तुम्हारा बुरा किया हो तो उसे भी भूल जाओ क्युकी किसी का भला करके उसे याद दिलाना के तुमने उसके लिए किया तो तुम्हारे कर्म का कोई मतलब नहीं …

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श्री तरुण सागर जी महाराज 23

मनुष्य की गहरी से गहरी और पहली बीमारी अहंकारहै! जहाँ अहंकार है, वहां दया झूठी है, जहाँ अहंकार है, वहां अहिंसा झूठी है, जहाँ अहंकार है, वहां शांति झूठी है, और जहाँ अहंकार है, वहां कल्याण मंगल और लोकहित की बातें झूठी है, क्योंकि जहाँ अहंकार है, वहां ये सारी …

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श्री तरुण सागर जी महाराज 22

पैदा होने वाला हर बच्चा ना तो हिन्दू पैदा होता है l ना मुसलमान l वह केवल दिगंबर पैदा होता है l और वह इंसान होता है l उसे हिंदी मुसलमान का नाम देकर धर्म की रोटिया मत सेकिए l हां हिन्दुस्तान में पैदा होने वाला हर आदमी हिंदुस्तानी जरूर …

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