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जानिये नवग्रह की शांति के उपाय

 

 

वेद पुराण में नवग्रह नौ ग्रहों को संयुक्त रूप से कहा गया है | जिसके अंतर्गत सात द्रष्य और दो छाया ग्रह है | सूर्य , चन्द्र , मंगल , बुध , गुरु , शुक्र व् शनि द्रश्य ग्रह है जबकि राहू और केतु छाया ग्रह है | ज्योतिष में ग्रहों की शांति के अनेक सिद्दांत प्रचिलित है | मंत्र – तंत्र – यन्त्र , टोटके , दान – पुन्य , रंग और अनेक प्रकार के कर्मकांडो के माध्यम से नव गृह की शांति की जाती है | प्राय : सभी की कुंडली में कही न कही अनिष्ट ग्रह स्थित होता है | ग्रहों की पीड़ा से बचने का एकमात्र उपाय उनकी शांति है | नीचे नवग्रहों की शांति के उपाय दिए गए है जिन्हें अपनाकर जातक नवग्रह की शांति कर सकता है |
– प्रथम सूर्य जो सभी ग्रहों का नेतृत्व करता है | इसे पिता और आत्मा का कारक मानते है , उसकी शांति के लिए पिता का सम्मान करे | पिता के साथ रहे | सूर्य को अघ्र्य चढ़ाए |
– चन्द्र जो माता और मन की शांति का कारक होता है | इसकी शांति के लिए सोमवार को भगवान शंकर का दूध मिश्रित जल अथवा पंचामृत से अभिषेक करे एवं महाम्रत्युन्जय मंत्र अथवा ॐ नम : शिवाय का जाप करे | माता को सम्मान दे |
– मंगल युद्द का देवता है | इसकी शांति के लिए हनुमान जी को सिंदूर और चोला चढ़ाए | मंगल वार को हनुमान चालीसा का पाठ करे |
– बुध ग्रह बुद्धि और व्यापार जगत का कारक है | बुध अच्छा होने से व्यक्ति ज्योतिषी , व्यापारी , वकील , डाक्टर होता है | बुध ग्रह शांति के लिए गणेश जी को मोदक के लड्डू चढ़ाए | जिनके संतान न हो वे संतान गोपाल स्त्रोत का पाठ करे |
– गुरु आध्यात्मिक ज्ञान का कारक है | अत : ब्राम्हण देवता , गुरु का सम्मान करे | वृहस्पति वार को ॐ ब्रम्ह वृहस्पताये नम : का जाप करे |
– शुक्र ग्रह जो सौन्दर्य , स्वास्थ्य , कला और काम का कारक होता है | उसके सम्मान के लिए पौक्षिक पदार्थो का सेवन करे | धुले हुए स्वच्छ वस्त्र पहने | हीरा रत्न धारण करे अथवा अमेरिकन जेरिकोन धारण करे | इत्र का प्रयोग करे | ब्राम्हणों की कन्याओ को भोजन कराए और यथासंभव दक्षिणा दे | सौन्दर्य प्रसाधन तथा श्रंगार की चीजो का दान शुक्रवार को करे | वैभव लक्ष्मी का व्रत करे| गाय को नित्य घास डाले |
– शनि ग्रह जो यमराज है तथा मोक्ष का कारक है | शनि कर्मो का फल देता है | इसके लिए काले कुत्ते को रोटी डाले | शनिवार को तिल मिश्रित तेल और लोहे का दान करे | गरीबो की सेवा करे | शनि अपना सुफल देगा |
– राहू ग्रह राजनीती का कारक होता है | यह कक्ष देता है और गुस युक्ति बल का कारक होता है| इसकी शांति के लिए भूरे कुत्ते को रोटी खिलाए | खोटा सिक्का नदी में प्रवाहित करे | ॐ रा : रहावे : मंत्र का राहू की महादशा , अन्तर्दशा में जाप करे |
– केतु ग्रह की शांति के लिए उसकी महादशा , अन्तर्दशा में जानवरों को भोजन कराए और चीटियों और चिडियों को दान करे

नवग्रह स्मरण मंत्र – :हर अनहोनी से बचाता है यह छोटा सा एक उपाय
इंसान और कुदरत का अटूट रिश्ता है। कुदरत की हर हलचल का इंसान पर और इंसान के हर काम का प्रकृति पर असर होता है। प्राचीन ऋषि मुनियों ने यही ज्ञान-विज्ञान जान-समझकर ग्रह-नक्षत्रों को सांसारिक जीवन के सुख-दु:ख नियत करने वाला भी बताया। यही नहीं, इंसान का कुदरत के साथ तालमेल बनाए रखने के लिए धार्मिक उपायों द्वारा ग्रह-नक्षत्रों की देव शक्तियों के तौर पर पूजा और स्मरण की अहमियत उजागर की। इसके मुताबिक हर ग्रह जीवन में विशेष सुख-दु:ख का कारक है। शास्त्रों में हर दिन ग्रह विशेष का खास मंत्रों से स्मरण सांसारिक कामनाओं को सिद्ध करने वाला बताया गया है। इसी कड़ी में नवग्रह उपासना के लिए हर रोज एक ऐसे शुभ मंत्र बोलने का उपाय भी बताया गया है, जिससे एक ही बार में सारे नवग्रहों का स्मरण किया जाता है। सरल शब्दों में कहें तो इस मंत्र विशेष से 9 ही ग्रह बलवान होकर भाग्य के दरवाजे खोलने वाले सिद्ध होते हैं। जानिए यह मंत्र विशेष

इस मंत्र के जरिए नवग्रह यानी सूर्य, सोम, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु व केतु का स्मरण एक ही साथ किया जा सकता है। यह हर दिन और काम को शुभ बनाने वाला व अनिष्ट से रक्षा करने वाला भी माना गया है। जानिए यह असरदार मंत्र व पूजा उपाय -नवग्रह स्मरण मंत्र –

ॐ ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी भानु: शशी भूमिसुतो बुधश्च।
गुरुत्व शुक्रश्च शनिश्च राहु: केतुश्च सर्वे प्रदिशन्तु शं मे।।

– हर रोज सुबह यथासंभव नवग्रह मंदिर में हर ग्रह की पवित्र जल से स्नान कर गंध, अक्षत, फूल अर्पित करें। धूप व दीप लगाकर नवग्रह मंत्र का स्मरण करें या जप माला से 108 बार स्मरण कर मंगल कामनाओं के साथ मिठाई का भोग लगाकर आरती करें।

– यही नहीं, किसी विद्वान ब्राह्मण से ग्रह विशेष के लिए विशेष पूजा सामग्री की जानकारी लेकर पूजा करना हर मनोरथसिद्धि करने वाला उपाय है।

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